गुरुवार 6 अगस्त 2026 - 11:48
अल्लाह की हिकमत से लाभान्वित होना इन्फ़ाक़ की सबसे बड़ी बरकतों में से एक है

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आज़ादी ने हौज़ा ए इल्मिया के एक शिक्षक ने कहा कि अल्लाह की राह में इन्फ़ाक़ करने की सबसे महत्वपूर्ण बरकतों में से एक अल्लाह की ओर से हिकमत का प्राप्त होना है। उन्होंने कहा कि शैतान इंसान को गरीबी का डर दिखाता है, लेकिन अल्लाह इस डर के बदले मग़फ़िरत रोज़ी में वृद्धि और कई गुना प्रतिफल का वादा करता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , क़ुम के हौज़ा ए इल्मिया के शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम सैय्यद मोहसिन आज़ादी ने कहा कि अल्लाह की राह में किए गए दान (इन्फ़ाक़) का एक सबसे महत्वपूर्ण प्रतिफल अल्लाह की दी हुई हिकमत है। उन्होंने कहा कि शैतान इंसान को गरीबी का डर दिखाता है, लेकिन अल्लाह इसके बदले मग़फ़िरत, रोज़ी में बरकत और कई गुना प्रतिफल का वादा करता है।

उन्होंने हज़रत फ़ातिमा मासूमा स.अ.के पवित्र हरम में आयोजित क़ुरआन की तफ़्सीर सभा में कहा कि मुहर्रम और सफ़र के महीने इलाही प्रतीकों को जीवित रखने अहलुलबैत (अ.स.) की सेवा करने और आशूरा की संस्कृति के समर्थन का श्रेष्ठ अवसर हैं।

उन्होंने कहा कि अहलुलबैत (अ.स.) की मजलिसों के आयोजन, ज़ायरों की मेज़बानी और ज़रूरतमंदों की सहायता पर खर्च करना, अल्लाह की राह में दान इन्फ़ाक़ फ़ी सबीलिल्लाह के सर्वोत्तम उदाहरण हैं। यदि यह दान केवल अल्लाह की प्रसन्नता के लिए हो, तो उसका महान प्रतिफल मिलता है।

हुज्जतुल इस्लाम आज़ादी ने सूरह बक़रह की आयत 261 से 274 का हवाला देते हुए कहा कि क़ुरआन दान की बरकत को एक ऐसे उपजाऊ बाग़ से तुलना करता है, जो अल्लाह की बारिश से कई गुना फल देता है। इसी प्रकार, धर्म और दीन की सेवा में किया गया हर खर्च अनेक बरकतों का कारण बनता है।

उन्होंने कहा कि क़ुरआन कंजूसी से सावधान करता है, क्योंकि इंसान के पास मौजूद सारी नेमतें अल्लाह की अमानत हैं। यदि उन्हें अल्लाह की राह में खर्च न किया जाए, तो उनकी बरकत समाप्त हो सकती है।

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अल्लाह ने इंसान को अपनी सबसे अच्छी और पाक संपत्ति में से दान करने का आदेश दिया है। ज़रूरतमंदों और अहलुलबैत (अ.स.) के ज़ायरों की सेवा तभी अधिक मूल्यवान होती है, जब वह सबसे उत्तम और हलाल माल से की जाए।

उन्होंने कहा कि दान में सबसे बड़ी रुकावट शैतान का बहकावा है, जो इंसान को निर्धनता का भय दिखाता है। जबकि अल्लाह इसके बदले क्षमा, रोज़ी में वृद्धि और कई गुना बदला देने का वादा करता है।

अंत में उन्होंने क़ुरआन की आयत यु'तिल-हिक्मता मय्यशा" (अल्लाह जिसे चाहता है, हिकमत प्रदान करता है) का उल्लेख करते हुए कहा कि अल्लाह की राह में सच्चे मन से किया गया दान इंसान को दिव्य हिकमत जैसी महान नेमत प्रदान करता है, जिसे क़ुरआन ने "ख़ैर-ए-कसीर" कहा है।

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha